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Eduspectra

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P-ISSN: 2394-9430 English Since 2017
Current Issue

Vol. 8 No. 8 (2018)

Article Volume - 8 (2022)

स्वामी दयानन्द सरस्वती का शिक्षा दर्शन : कोविड-19 के संदर्भ में

Authors
सहायक आचार्य एस.एस.जी. पारिक स्नातकोत्तर शिक्षा महाविद्यालय जयपुर (राजस्थान) भारत
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Published 2026-02-05
Abstract

शोध-सार : स्वामी दयानन्द सरस्वती की शैक्षिक विचारधारा का गहन अध्ययन करने पर हमें पता चलता है कि स्वामी जी शिक्षा को मानव कल्याण के लिए अनिवार्य मानते थे। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य का सर्वांगीण विकास करना होता है। बालक को आजीविका अर्जन के लिए सक्षम बनाने का कार्य शिक्षा ही करती है। स्वामी जी राष्ट्र के प्रति प्रेम जागृत करना शिक्षा का उद्देश्य मानते थे। गुरु का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है। बालक के लिए गुरु सदैव सम्माननीय होता है। छात्र को गुरु के समीप में रहकर ही शिक्षा प्राप्त करनी   चाहिए। छात्र का जीवन पूर्ण अनुशासित एवं मर्यादित होना चाहिए। शिक्षा का कार्य बालक में नैतिक मूल्यों का विकास करना है। शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति में सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, धार्मिक एवं नैतिक मूल्य विकसित होते हैं। बालक की मनोवृत्तियों का पूर्णत: विकास सामाजिक परिवेश में ही किया जाना चाहिए ताकि बालक सामाजिक बन सके व अपने जीवन का विकास कर सके।

Keywords
शिक्षा नैतिक मूल्य सर्वांगीण विकास शैक्षिक विचारधारा
References
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