कोरोना-काल में रंगमंच का शिक्षण और प्रशिक्षण ##plugins.themes.bootstrap3.article.main## Abstract सारांश शोध-सार — कोरोना महामारी का समय सभी के लिए बहुत बुरा दौर था। जीवन के तमाम क्षेत्रों के समान प्रदर्शनकारी कलाओं और उनसे जुड़े शिक्षण-प्रशिक्षण पर इस काल का नकारात्मक प्रभाव रहा। रंगमंच का शिक्षण और प्रशिक्षण भी इस दुष्प्रभाव से अछूता नहीं रह सका। रंगमंच से जुड़े सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में प्रशिक्षण की प्रक्रिया बाधित हुई। प्रशिक्षु रंगमंच का व्यावहारिक प्रयोग सीखने से वंचित हो गये। रंगमंच कला से जुड़े कलाकारों के जीवन-यापन का संकट आ पड़ा। अनलॉक होने के बाद स्थितियाँ बहुत मंद गति से सुधरती हुई दिखाई पड़ रही हैं। यही कोरोना-काल ने रंगमंच के प्रशिक्षण के पारंपरिक तरीकों के अलावा नए विकल्पों पर भी विचार करने को विवश कर दिया। References . डॉ. सिडाना अशोक एवं डॉ. पी.एन. (2006), सामाजिक अध्ययन शिक्षण, पृ. सं. 276–312. • डॉ. परवीन आबिदा एवं डॉ. अग्रवाल संध्या (2006), सामाजिक अध्ययन शिक्षण, आस्था प्रकाशन, पृ. सं. 283–290. • वशिष्ठ, उमेश कुमार (2000), शैक्षिक अनुसंधान विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी। • राय, पारसनाथ (1974), अनुसंधान परिचय लक्ष्मीनारायण अग्रवाल प्रकाशन, आगरा। Download Article Download Pdf Submission Details Published: 2026-02-05 Issue: Volume - 8 (2022) Section: Article Authors प्रो. आशा हिंदी विभाग अदिति महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय प्रो. अनिल शर्मा हिंदी विभाग जाकिर हुसैन कॉलेज (सांध्य) दिल्ली विश्वविद्यालय Keywords कोरोना-काल अनलॉक शिक्षण प्रशिक्षण राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंग-संस्थान सोशल मीडिया ऑनलाइन